Author: Ashish

गणेश उत्सव का श्री गणेश

Ashish इस लेख की शुरुआत मैं बाल गंगाधर तिलक के एक कथन से करना चाहूंगा। “गीता धर्म कैसा है?………… वह सम है,अर्थात वर्ण, जाति, देश या किसी अन्य भेदों के झगड़ों में नहीं पड़ता,बल्कि सब लोगों को एक जैसे ही सद्गति देता है। वह अन्य सब धर्मों के विषय में यथोचित सहिष्णुता दिखलाता है। वह ज्ञान

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जन्माष्टमी की सार्थकता

आशीष कुमार यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥४-७॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥४-८॥ यह श्लोक हिंदू ग्रंथ गीता के प्रमुख श्लोकों में से एक है, जिसमें श्री कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं की जब-जब धर्म की हानि होती है अधर्म बढ़ता है सज्जन लोगों की

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