महामनस्वी ललित कुमार जोशी

राम भुवन सिंह कुशवाह

कुशल प्रशासक,पत्रकारों के महान हितचिंतक, अद्भुद शख्सियत हर दिल अजीज सेवा निवृत्त आईएएस अधिकारी ललित कुमार जोशी का निधन! आत्मीय श्रद्धांजलि !

जो जोशी जी को किंचित भी जानता होगा उसका दिल आज दुखी हुए बिना नहीं रहेगा। यद्यपि हम लोगों से मिले कोई एक दशक से ज्यादा हो गया होगा किन्तु आज भी उनकी यादें हमारे मानस पटल पर स्थायी रूप से अंकित हैं।

आज हम यह कहने की स्थिति में हैं कि ऐसा जनसंपर्क आयुक्त और प्रशासनिक आई ए एस अधिकारी ‘भूतों न भविष्यति’ ! मैं परमपिता परमात्मा से अनुग्रह करुंगा कि उन जैसे अधिकारी और उनके समय जैसा जनसंपर्क का माहौल बार बार मध्यप्रदेश को देता रहे।उनकी आत्मा की शांति के लिए तो किसी से प्रार्थना करने की आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि आत्मा स्वयं पूर्ण ब्रम्हस्वस्वरूप है।ऐसे बिरल व्यक्ति उसी परमात्मा की विशेष कृपा से समय को मिलते हैं।

क्योंकि उनकी मधुर स्मृतियां मेरे जैसे असंख्य लोगों के मन में होंगी और जो यह खबर सुनेगा,पढ़ेगा उसके मन में भी मेरी जैसी भावनाएं असंदिग्ध उसके अंतर्मन में भी उमड़ रही होंगी।और यह भी बता दूं कि मैं उनके लिए कोई विशेष लाडला नहीं था।भोपाल के ही सैकड़ों लोग न केवल पत्रकार,अधिकारी बल्कि सामान्य लोग भी उसी तरह से ललित जी से जुड़े थे जैसा मैं अनुभव कर रहा हूँ।वेराइटी बुक स्टोर के मालिक श्री सतपाल जी वाधवा ने जबसे यह ख़बर सुनी है उनके बुरे हाल हैं।

बता दें कि आईएएस अधिकारी ललित कुमार जोशी का शुक्रवार की शाम दिल्ली में निधन हो गया। वे दिल्ली के वसंतकुंज निवासी थे। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के एमपी कैडर के 1970 बैच के आईएएस अधिकारी ललित कुमार जोशी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बैचमैट थे। काफी लंबे समय तक उन्होंने जनसंपर्क विभाग में आयुक्त के तौर काम किया। इस दौरान उन्होंने जनसंपर्क में संचार के माध्यम को एक नया आयाम दिया था। वे जनसंपर्क विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर भी रहे और उन्होंने विभाग के कार्यों पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी।

वे भारत सरकार में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे और सेवानिवृत्ति के पश्चात सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के वाइस चेयरमैन भी रहे। उन्होंने मध्यप्रदेश में आईएएस नियुक्त होने के बाद अपना कैरियर बस्तर में सहायक कलेक्टर से शुरू किया और वे वहां कमिश्नर भी रहे। मध्य प्रदेश में स्कूल, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, जल संसाधन और अन्य प्रमुख विभागों में सचिव, प्रमुख सचिव और आयुक्त और नर्मदा घाटी विकास विभाग के उपाध्यक्ष भी रहे। प्रशासनिक क्षेत्र के अलावा समाज के विभिन्न वर्गों में भी वे लोकप्रिय थे। वे पुस्तक प्रेमी और अध्ययन शील व्यक्ति थे। उनके पास एक समृद्ध पुस्तकालय रहा जिसे वे हमेशा नई नई पुस्तकें खरीद कर उसे समृद्ध बनाते रहे। श्री जोशी पिछले कई वर्षों से कैंसर से पीड़ित थे। पिछले 1 माह से वे ज्यादा अस्वस्थ थे । सेवानिवृत्ति के पश्चात वे दिल्ली में ही रह रहे थे।

माखनलाल चतुरवेदी विवि उनकी जनसंपर्क में सेवा के दौरान ही बनी थी। वे बेहद अध्यनशील, बहुत ही अच्छे लेखक थे। वैसे तो एलके जोशी जी फिजिक्स के स्टुडेंट थे, लेकिन उन्होंने हिस्ट्री में भी एमए किया था। बेहद अच्छे इंसान थे और कर्मठता, ईमानदार, प्रतिबद्धता, जनकल्याण के आर्दश भी रहे। बस्तर के कमिश्नर रहे इस दौरान उन्होंने आदिवासी कल्याण के लिए जमीनी स्तर पर काम किया। आईएस अधिकारी होते हुए भी वे साइकल या पैदल ही दौरा करते थे।

वे यदाकदा हमें रात्रि भोजन पर ले जाते थे।पहले दिन जब मैं उनके निमंत्रण पर उनके चार इमली के बंगले पर पहुंचा तो बड़ी आत्मीयता से मेरा स्वागत किया।वैसे उस समय मैं भोपाल में आया ही था,स्वदेश भिण्ड का संवाददाता होने केसाथ भोपाल में अत्यंत कनिष्ठ भी था।सरकार कांग्रेस की थी।मेरी उस समय भोपाल के समाचार कम्युनिटी में कोई खास हेंशियत भी नहीं थी किन्तु इतने बड़े अधिकारी ने मुझे खाने पर बुलाया है,यह मेरे लिए आश्चर्य और गौरव का विषय भी था।पर उन्होंने जिस विशिष्ट विधि और आत्मीयता से आतिथ्य दिया वह मेरे जीवन का महत्वपूर्ण क्षण था। यद्यपि मैं उनके खाने की मेज पर उनकी अपेक्षा के अनुरूप खरा नहीं उतर पाया पर फिर भी जब उन्हें ड्राय डे रखना होता तो मुझे ही अक्सर बुलाते थे।वैसे वे सुबह से ही अपने वाणगंगा कार्यालय में बैठ जाते और कई लब्ध प्रतिष्ठित पत्रकारों के लिए तो उनका कार्यालय एक तरह से रेस्टोरेंट जैसा ही बन गया था।सबसे आश्चर्य का विषय होता कि उसका भार शायद ही कभी जनसंपर्क के बजट पर पड़ता हो,यह मेरी अपनी जानकारी के अनुसार कह रहा हूँ।

उनकी एक अनुकरणीय विशेषता थी कि वे बहुत बड़े पुस्तक प्रेमी थे।उन्हें जब भी मालूम होता कि नई पुस्तक बाजार में आई है अगले ही दिन उनकी मेज पर होती थी।उन्हें जब मालूम हुआ कि मैं भी पुस्तको में गहरी रुचि रखता हूँ,मुझसे विशेष प्रेम करने लगे थे और अधिकांश समय नई पुस्तकों की चर्चा पर लगाते थे और हमारा उत्साह बर्द्धन करते थे।उनका पुस्तक पढ़ने का भी अद्भुद और अनुकरणीय तरीका था।वे जो पुस्तक पढ़ते थे उसका नोट भी बनाते जाते थे।उनके बंगले पर उनका निजी पुस्तकालय विशाल था और उन पुस्तकों को बड़े करीने से सजा रखीं थीं।उतना ही विभागीय पुस्तकालय को समृद्ध करते रहते थे।

एक व्यक्ति के रूप में जोशी जैसे अधिकारी कम ही मिलते हैं।वे हर समय पत्रकारों और अपने विभाग के अधिकारियों के लिए सहायता को तत्पर रहते थे।उनकी अहेतुकी मदद की कैसे व्यख्या करूँ ? कुछ समझ में ही नही आता।एक उदाहरण देने में मुझे कतई संकोच का अनुभव नही होता जबकि ऐसी सहायता बताने में मेरे जैसे कई खुद्दार पत्रकार संकोच करेंगे।पर यह बताने में मुझे किंचित भी कॉम्प्लेक्स नहीं होगा।प्रसंग ऐसा था कि मुझे अपनी पुत्री की शादी करनी थी।लग्न के साथ मेरे पास धनाभाव था।मैंने जोशी जी से मेरा विज्ञापन का भुगतान करने का आग्रह किया और अपनी समस्या बताई।वे चुपचाप सुनते रहे किन्तु उन्होंने कुछ कहा नहीं।शाम को श्री रवींद्र पंड्या का टेलीफोन आया कि थोड़ी देर के लिए क्या मैं आ सकता हूँ।मैंने कहा -“कुछ व्यस्तता है,बेटी की शादी की तैयारी में लगा हुआ हूँ।” उन्होंने फिर आग्रह किया कि थोड़ी देर के लिए ही आ जाऊं।मैं डीपीआर पंहुचा तो उन्होंने दराज में से एक लिफाफा निकाल कर दिया।मैंने प्रश्न वाचक मुद्रा में देखा तो उन्होंने कहा कि जोशी जी ने निर्देश दिया है।मैंने साफ मना कर दिया,मैंने यह प्रण किया हुआ था कि सरकार से एक पैसा भी मदद नहीं लूंगा। उन्हें अपना मंतव्य बताकर चलने लगा तो उन्होंने कहा कि आपकी वार्षिकी के विज्ञापन का देयक विचाराधीन है,उसी के अगेंस्ट यह एडवांस पेमेंट किया जा रहा है।उसकी प्रक्रिया में कुछ देर लगेगी तो जोशी जी ने कहा है कि मुझे अग्रिम दे दिया जावे।मैंने पावती देने के लिए कागज देने को कहा तो उन्होंने कहा है कि जोशी जी का यह भी निर्देश है कि पावती बाद में ले ली जावे।

उनकी ऐसी सदाशयता के कई उदाहरण हैं और वे किसी भी पत्रकार की सामने प्रशंसा या सहायता भलें न करते हों उसके पीछे काफी प्रशंसा और मदद किया करते थे।कई बार मुख्यमंत्री पत्रकारों के बारे में राय पूँछते तो उसके बारे में उनकी सकारात्मक राय ही रहती।यह जानकारी कई बार मुझे स्वयं तत्कालीन मुख्यमंत्रियों ने बताई थी।

खैर उनके सम्बन्ध में बहुत कुछ लिखा जा सकता है पर यहां शब्दों की सीमा है और मित्रो के पढने के धैर्य की भी चिंता करनी है।

अतः ऐसे महामनस्वी को शत शत नमन करते हुए ईश्वर से प्रार्थना है कि इसकिस्म के अधिकारी और भी इस प्रदेश को देता रहे।
ॐ शांति शांति भवतु!💐💐